
मणिपुर की सियासत में इस वक्त तेज़ हलचल देखने को मिल रही है। प्रदेश में नई सरकार के गठन की प्रक्रिया निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। दिल्ली में हुई मणिपुर भाजपा विधायक दल की बैठक में युमनाम खेमचंद सिंह को सर्वसम्मति से BJP Legislature Party Leader चुन लिया गया है। अब यह लगभग तय माना जा रहा है कि वे ही मणिपुर के अगले मुख्यमंत्री होंगे।
राष्ट्रपति शासन के बाद सत्ता वापसी की तैयारी
गौरतलब है कि मणिपुर में 13 फरवरी 2025 से राष्ट्रपति शासन लागू है। लगातार हिंसा, सामाजिक तनाव और तत्कालीन मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह के इस्तीफे के बाद राज्य में संविधान के अनुच्छेद 356 के तहत यह कदम उठाया गया था।
अब 12 फरवरी 2026 को राष्ट्रपति शासन समाप्त होने वाला है, और उससे पहले ही नई सरकार के गठन की पटकथा तैयार हो चुकी है।
कौन हैं युमनाम खेमचंद सिंह?
युमनाम खेमचंद सिंह को मणिपुर की राजनीति में अनुभवी, संतुलित और संगठन-सक्षम नेता के रूप में देखा जाता है। दो बार के विधायक, बीरेन सिंह सरकार में मंत्री रह चुके, ग्रामीण विकास और पंचायती राज जैसे अहम विभाग संभाले। मैतेई समुदाय से संबंध। विधानसभा स्पीकर के तौर पर निष्पक्ष छवि। राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि हिंसा प्रभावित राज्य में प्रशासनिक संतुलन साधने के लिए खेमचंद सिंह को सुरक्षित विकल्प माना गया।
विधायक दल नेता का चुनाव कैसे हुआ?
दिल्ली में आयोजित बैठक में BJP हाईकमान की मौजूदगी में युमनाम खेमचंद सिंह के नाम पर मुहर लगी। इस पूरी प्रक्रिया के लिए भाजपा संसदीय बोर्ड ने राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ को केंद्रीय पर्यवेक्षक नियुक्त किया था।
दिसंबर से चल रही थी अटकलें
नई सरकार के संकेत पहली बार 14 दिसंबर को मिले थे, जब मणिपुर भाजपा विधायक दल ने दिल्ली स्थित पार्टी मुख्यालय में अहम बैठक की थी।
उस बैठक में मौजूद थे पूर्व CM एन. बीरेन सिंह, विधानसभा अध्यक्ष थोकचोम सत्यव्रता सिंह, संगठन महामंत्री बी.एल. संतोष, संबित पात्रा, मणिपुर BJP अध्यक्ष शारदा देवी और 34 से अधिक भाजपा विधायक।

यहीं से साफ हो गया था कि सत्ता में वापसी बस वक्त की बात है।
विधानसभा गणित: BJP की मजबूत स्थिति
60 सदस्यीय मणिपुर विधानसभा में फिलहाल समीकरण BJP के पक्ष में है-
- BJP – 37 विधायक
- NPP – 6
- NPF – 5
- कांग्रेस – 5
- KPA – 2
- JDU – 1
- निर्दलीय – 3
- 1 सीट रिक्त (विधायक के निधन से)
विधानसभा का कार्यकाल 2027 तक है, हालांकि फिलहाल वह निलंबित अवस्था में है।
मणिपुर अब राष्ट्रपति शासन से राजनीतिक स्थिरता की ओर एक नया अध्याय लिखने जा रहा है। युमनाम खेमचंद सिंह की ताजपोशी सिर्फ सत्ता परिवर्तन नहीं, बल्कि हिंसा से जूझ रहे राज्य के लिए बड़ा राजनीतिक टेस्ट होगी।
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